अमलतास की स्वर्णिम फुहारें 21.04.26, मंगलवार, आग्नेय नगर, नवेगांव, परसवाड़ा-बालाघाट आग्नेय-नगर (ओह-रम सिटी), जहां मैं रहता हूं, उसके चारों ओर घूम लो तो लगभग दो किलोमीटर हो जाते है। इस के जितने बन पड़ें, उतने फेरे ले लो और दो का पहाड़ा पढ़ लो तो कुल किलोमीटर निकल आते हैं। दो किलोमीटर यानी लगभग ढाई हज़ार चरण-चाप। शक्कर के और बेतहासा मोटापा के मरीज़ दस हज़ार चरण-चाप चलते हैं। यानी कॉलोनी के पांच चक्कर । मैं किसी के चक्कर नहीं लगाता। स्वस्थ रहने के लिए दो चार किलोमीटर ठीक हैं। उतना मैं चल लेता हूं। हालांकि बोझ-बाहुल्य होने कारण ख़ैर ख़्वाह मतदाता और चिकित्सक कहते हैं कि दस हज़ार किलोमीटर चला करो। मैं नहीं मानता। कोई आया है तो किसी उम्मीद से ही आया होगा, क्यों बेकार भगाना? बहरहाल, मैं घूमता हूं। सीधा सीधा नहीं घूमता, 'फ़िगर ऑफ एइट' यानी अंग्रेजी के आठ की आकृति में घूमता हूं। पूरा आग्नेय नगर चार भागों में बंटा हुआ है। इस हिसाब से इसमें पांच आड़े रास्ते हुए और दो खड़े। दोनों खड़े रास्तों से ही सभी पांचों रास्ते जुड़े हुए ...