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नव वर्ष: किचन के संदर्भ में

किचन में पर्ववत् सन्नाटा है। मैं चाहता हूं नए वर्ष की सरगर्मी और उत्साह मेरे किचन में भी दिखाई दे। मैं बार बार किचन में जाता हूं और मिट्टी तेल के पीपे को उलटता पलटता हूं और निराश हो जाता हूं। मैं जादूगर आनंद या पी सी सरकार होता तो ऐसी निराशा मुझे नहीं होती। मैं एक बार मिट्टी तेल के खाली पीपे को हिलाता और उसे किचन में रखकर बेडरूम में चला जाता। बिस्तर पर पालथी मारकर बीड़ी के चार पांच कश लेता और बुझाकर उसे मिट्टी के एक कुल्हड़ में डाल देता । फिर बड़े इत्मीनान से किचन में घुसता । संजीवकुमार की तरह बांह हिलाकर कमीज की आस्तीनें बिना हाथ लगाए ऊपर सरकाता और झुककर पीपा उठाता । अब पीपा मिट्टी तेल से भरा होता। तालियों की गड़गड़ाहट से किचन भर जाता । ज्यादातर ये तालियां किचन में उपस्थित खाली डिब्बे और पतीलियां , अपने जलने का इंतजार करता स्टोव और केवल बीड़ी पीने के लिए इस्तेमाल की जा रही माचिस की डिबिया ही बजा रही होतीं। किचन में जो मुट्ठी भर भरी भरी सी चीजें होतीं वे अपने आभिजात्य के गर्व में केवल मुंह बनाती या दिखावे के लिए मुस्कुराती। मगर यह तो एक संभावित असंभव कल्पना है। वास्तविकता यह है कि किच...