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भटा-भात और ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा

श्रीमान भटा को कौन नहीं जानता। भटाप्रसाद आलूलाल के कनिष्ठ और गोभीरानी के ज्येष्ठ भ्राताश्री हंै। शाकाहार करनेवालों की परम्परा में जैसे अध्यात्म के त्रिदेव हंै, वैसे ही सब्जी में यही तीन देवता प्रसिद्ध हैं। भटे के बारे में कुछ और बातें कहने के पहले भटे पर एक कवितानुमा गद्य या गद्यनुमा कविता या कवितानुमा तुकबाज़ी पढ़ें। कवि कहता है- जैसे जुल्फों को घटा कहते हैं , जैसे जूड़े को जटा कहते हैं , जैसे पीढ़े को पटा कहते हैं , वैसे ही बैंगन को भटा कहते हैं । जैसे ऊंट की करबट होती है वैसे बैंगन की एक थाली होती है ऊंट की करबट को लोग नहीं जानते बैंगन की फितरत को थाली तक नहीं जानती। कहते हैं बैंगन यानी भटा बादी होता है इसकी एलर्जी होती है किसी को सूजन होती है किसी को खुजली होती है सुना है भटा खाकर जो करते हंै यात्रा वो भटक जाते हैं हालांकि ऐसा सुनकर भटा-प्रेमियों के मुंह लटक जाते हैं यानी भटे के कई रूप है ,कई रंग है सब्जियों के राजा आलू के वह संग है ,अंतरंग है यूं तो गोभीरानी का भी भटा साथ निभाता है परन्तु कभी कभी गुरुदेव रवीन्द्र की तरह अकेला ही पतीली में ...