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Showing posts with the label गर्मी का नवगीत

फिर गर्माए दिन

* घूम रहे हैं लिए सुपारी, गर्मी खाकर दिन!                 - फिर गरमाए दिन! * खुली खिड़कियां बंद हो रहीं कैद हुईं बतकहियां! सूखी आँगन की फुलवारी मंद हुयीं चहचहियां! आस पड़ोस विदेश...