नीलिमा और शुक्ला : दो जुड़वा बहनें नीली और सफेद पेट्रिया वोलुबिलिस प्रकृति किसी वनस्पति, जीव, भूखंड, नदी, नाले, वृक्ष, फूल, फल, पौधे, पत्थर, कंकर, पहाड़, खाई, खोह या कोह आदि को कोई नाम नहीं देती। मनुष्य देता है। अनाम भूखंड, द्वीप, महाद्वीप, प्रायद्वीप, समुद्र आदि के नाम देकर रहनेवाले मनुष्य चाहे यूरोप के हों या एशिया के, इंडोनेशिया के हों या इंडिया के, एक अनाम भूखंड को नाम देकर रहनेवाले अनाम जीव ही तो थे। ये अनाम जीव ही आर्कमिडीज़ होकर लोकप्रिय हुए या आर्यमिहिर होकर ख्यातनाम हुए। इनमें कोई घुमक्कड़ कोलम्बस हुआ, कोई घुमक्कड़ वास्कोडिगामा हुआ। कोई इतिहासकार इब्नेबतूता हुआ तो कोई ह्वेनसांग हो गया। फाह्यान, मार्कोपोलो, अलबरूनी, होरोडोटस, मेगस्थनीज, कल्हण, अबुलफजल आदि एक लंबी फेहरिस्त है। इन यायावरों और इतिहासकारों के नाम हटा दीजिए तो क्या बचेगा? एक रंगहीन शून्य। हमारे नाम और भारतीय संदर्भों में हमारे सरनेम (उपनाम या जाति-नाम) ही हमारी पहचान है। हमारे धर्म की पहचान है। धर्म बदलते ही उपनाम और ...
संदेश की खोज नयागांव, बालाघाट, १३.०९.२०२६, रविवार। आज सुबह सुबह फिर सपना देखा। मैं सपने देखता हूं, बचपन से देखता हूं। मैं ही देखता हूं, सपनों ने मुझे कभी नहीं देखा। शायद सपनों की आंख नहीं होती। हमारी होती है। सपनों के पास दिमाग भी नहीं होता, बुद्धि और विवेक भी नहीं होता। भारतीय फिल्मों की तरह वे, कुछ भी अतार्किक, बेसिरपैर की घटनाएं देखते रहते हैं। जैसे एक सपना साइकिल पर बैठा और चल पड़ा। रस्ते में पहाड़ आया तो वह हेलीकॉप्टर चलाने लगा। हेलीकॉप्टर अचानक सैटेलाइट बन गया गया और पृथ्वी के चक्कर लगाने लगा। सपना पूरे मध्यप्रदेश में घूमने लगा। सतपुड़ा की चोटियां, जंगलों का सौंदर्य, नदियों के घुमावदार बहाव। फिर समुद्र आ गया। सैटेलाइट जंगी जहाज बन गया। अचानक एक टॉरनेडो आकर टकराया और ब्लास्ट। जहाज के परखचे उड़ गए। सपना किनारे की रेत पर उठकर कपड़े झाड़ने लगा। यह मैं था क्योंकि सपने में मैं ही था। इसलिये जहाज के ब्लास्ट होते ही मैं पलंग से गिर पड़ा ...