श्मशान चंपा * 1. आज 1 जनवरी 2026, रविवार संत रविदास जयंती यानी माघी पूर्णिमा है। सुबह से सोशल मीडिया में संत रविदास जयंती की बधाइयां और शुभकामनाएं प्रकाशित होनी शुरू हो गयी हैं। संत रविदास जयंती, माघी पूर्णिमा मेरी मां की पुण्य तिथि भी है। इसलिए जब भी रविदास जयंती की सुगमुगाहट होती है, मेरे अंदर मां के जाने का हौल जाग जाता है। जैसा कि सुना है, 6 फरवरी 1993 के साढ़े छः बजे मां नित्यक्रिया से निवृत्त होकर अस्पताल के बिस्तर पर बैठी और तकिये के नीचे माला ढूंढने लगी। वह नहीं मिली। और मां अस्पताल के बिस्तर पर ही लुढ़क गयीं। कफ़ के बहुत बिगड़ जाने से मां को रात में ही प्रियदर्शनी ज़िला चिकित्सालय में भर्ती किया गया था। इंजेक्शन और दवाएं देकर उन्हें सुला दिया गया था। सुबह सुबह नहा धोकर मां नियमित रूप से जाने कितने सालों से माला करती थीं। वही उनका इनहेलर था। उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की हड़बड़ी में उनकी माला घर में रह गयी थी। माला कोई ज़रूरी सा...
परजीवी-प्रतिलिपियों के देश में संस्कृत साहित्य के प्रसिद्ध और सिद्ध कवि एवं नाटककार कालिदास की तुलना अंग्रेजी और लैटिन के नाटककार शेक्सपीअर से की जाती है। कालिदास को संस्कृत का शेक्सपीअर और शेक्सपीअर को इंग्लिश का कालिदास बतानेवाले विद्वानों के दोनों भाषाओं के ज्ञान का पता चलता है। लोकप्रियता और स्थानन की दृष्टि से यह तुलना एक सीमा तक ठीक है लेकिन कथ्य या विषयवस्तु, शिल्प, भाषा, शैली, चरित्र-चित्रण और उद्देश्य के भारोत्तोलन में दोनों में बहुत भिन्नता है। शेक्सपीअर ने ऐतिहासिक पात्रों को अपने नाटकों का कथ्य बनाया और कालिदास ने पौराणिक कथाओं को आधार बनाया। शेक्सपीअर में लैटिन और अंग्रेजी कविता की ऊंचाइयां देखने मिलती हैं तो कालिदास में संस्कृत काव्य के सौंदर्य की पराकाष्ठा दिखाई देती है। शायद काव्य सौंदर्य की ऊंचाइयों की दृष्टि से दोनों को अपने अपने देश की चरम विभूतियां निरूपित किया जाता है। किंतु भारत का कोई कवि अपने आपको बिहार या गुजरात का कालिदास कहे या कोई अंग्रेजी कवि अपने को इंग्लैं...