लीगल सूचना: मृत्यु कोई भयानक हौलनाक चीज नहीं है। कम से कम दूसरों की तो बिल्कुल नहीं। मृत्यु भी एक परिवर्तन है, जिससे हम नहीं डरते। परिवर्तन तो जिन्दगी में एक नया चार्म है। गीता भी यही कहती है। एक जगह रहते हुए ऊब गए हो तो उठो, कपड़े बदलो, कहीं घूम आएं। किसी की मृत्यु होती है तो कुछ लोग दाह संस्कार कब्र अब्र की तैयारी करते हैं, कुछ लोग खाली होते हैं तो हंसी मजाक (धीरे धीरे ही सही) करते हैं, समय काटते हैं। आइए, एक शवयात्रा में आपको भी ले चलें। भाई एक शर्त है मगर -सीरियस मत होना। मृत्यु का, यानी कपड़े बदलकर घूमने का चार्म खत्म हो जाएगा। प्लीज.... 1. को जाने कंह मारिसी युक्तेश भाई राठौर नहीं रहे। युक्तेश भाई राठौर कौन थे, यह मैं भी नहीं जानता। मैं जानता तो वे रहते, ऐसा भी नहीं है। जिनको रहना होता है, वे लाख अपरिचित होने पर भी रहते हैं। जिनको नहीं ही रहना है, उनके लाखों परिचित हो तो भी वे नहीं रह पाते। रहने और नहीं रहने का कोई बीज-गणित नहीं होता। होता तो खैर उसका कोई अंक गणित भी नहीं है। सौ साल रहें या बीच में ही चल दें, यह किसी के संज्ञान में नहीं...