डर इतना मन में भरा हुआ होता है कि भारी मन से हल्के धंुधलके में भी रस्सी को सांप समझकर लोग सहम जाते हैं, हड़बड़ाकर भागने के कारण लड़खड़ाकर गिर जाते हैं। घबराहट में धड़कनें तेज हो जाती हैं, आंतें सिकुड़ने लगती हैं, पैरों में खिंचाव होने लगता है, शरीर कांपने लगता है। रक्तचाप की जांच की जाये तो वह बढ़ा हुआ मिलेगा, अल्ट्रा साउंड में हार्ट बीट की फ्रिक्वेंसी हाई होगी। सोनोग्राफी आंतों की कराई जाये तो आंतों में भय चिपका हुआ मिलेगा। मुंह सूखेगा, त्वचा जलेगी, पसीना निकलेगा। जैसा कि युद्ध भूमि में अर्जुन के साथ हुआ था। पहले तो बहादुरी के साथ कृष्ण से बोला कि दोनों सेनाओं के बीच ले चलो। फिर सशस्त्र सेना में अपने ही भाई-बंधुओं को देखकर मोह-जनित पीड़ा और क्षोभ से डर गया। डर कर कृष्ण से कहने लगा- ‘‘सीदंति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति। वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते।। 29/1 डर, घबराहट, आघात जैसी उपरोक्त परिस्थितियों में सामान्योपचार या घरेलू इलाज यह है कि बड़ा हो तो पीठ थपथपा दो, छोटा बच्चा हो तो उसे सीने से लगा लो। ज्ञानवान हो तो उसे ज्ञान की बातें बताकर जागृत कर लो। कृष्ण ने...