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Showing posts with the label स्मृति शेष

फिसलनेवाले फर्स में एक शाम

पोली मेगामार्ट की वह शाम अभी भी आंखों में बसी हुई है। हम उस शाम मार्बल सिटी में थे और मेगामार्ट के बारे में उत्साह से जानकारी देनेवाली हमारी बच्ची ही थी जो मां को मल्टीपल किचन-वेयर उपलब्ध कराना चाहती थी। ऊमस भरी दोपहरी थकी हुई नींद से जागकर अभी अभी शाम में ढली थी। शाम का सदुपयोग हमारे तीन लक्ष्यों पर आधारित था : पहला पोली मेगामार्ट की सैर और खरीददारी, दूसरा मॉल की तफ़रीह , तीसरा चैपाटी ,सोनाली या रूपाली में किसी एक के ‘सौजन्य’ पर भोजन। पहला नाम चौपाटी, जग जाहिर है कि चैपाटी नाम के स्थान , बम्बई उर्फ मुम्बई की तर्ज पर बड़े बड़े शहरों में लगनेवाले चटोरी चाट के शौकीन इलाके हैं। बाकी के दो नाम ; सोनाली और रूपाली हाई-स्टेडर्ड के भोजनालय हैं। हम पहले लक्ष्य की ओर बढ़े। लक्ष्य के लिए बहुत दूर नहीं जाना पड़ा। पास ही था। बच्चियों का फ्लेट पॉज़ इलाके में था जो केन्द्रीय बाजार के मध्य में ही था। मेगा मार्ट में आज काफी चहल पहल थी। आज कुछ चीज़ों पर 40 प्रतिशत का डिस्काउंट ऑफर था और चांवल के पांच किलो के एक पैक के साथ एक पैक फ्री था। किसी भी मध्यम वर्गीय परिवार को यह लुभानेवाला खेल था। हम भी इससे आ...

सभी परिन्दे उड़ जाते हैं पेड़ खड़ा रह जाता है।

नैनपुर की पहचान उमाशंकर के साथ होती है। नैनपुर के सबसे बड़े भूखण्ड के वे स्वामी थे। स्कूल , कारखाने, गोदाम , बिल्डिंग , बैंक भवन ,जीवनबीमा भवन सब उनके थे। सबसे ज्यादा लोग उनके थे । अमीर उनके थे गरीब उनके थे। सभी विभागों के अधिकारी उनके थे। छोटे बड़े कर्मचारी उनके थे। वे अपने एक मित्र के इलाज के सिलसिले में मुबई गए थे। एक होटल में कमरा बुक करा रहे थे। फोन पर बात करते हुए वे एक खराब लिफ्ट के टूटे हुए बाटम से नीच गिर गए। उनके न रहने की खबर नगर को मिली और सब स्तब्ध रह गए। हमने सीखा है सलीक़ा तुम्हीं से जीने का। दर्द सहने की अदा ,ढंग ज़ख़्म सीने का । हादसों और करिश्मों से भरी दुनिया में, मौत दरवाज़ा खुला छोड़ती है ज़ीने का।। 0 रखी तुमने बुनियाद , जब ज़िन्दगी की। अदा हमने सीखी है , तब जिन्दगी की। वो मुस्काते आना , वो मुस्काते जाना, तुम्हें आंखें ढूंढेगी , अब ज़िन्दगी की।। 0 इस मिट्टी का चलन निराला , गिनगिन बोते अनगिन पाते। बीच सड़क का नगर ज़िन्दगी , कितने आते कितने जाते। पत्थर होकर रह जाते हैं , शिलालेख लिखवानेवाले , अमिट वही चेहरे होते जो दिल पर छाप छोड़कर जाते ।। 0 भीड़ भाड़ से भरा रास्ता यहीं पड़ा रह जात...