Tuesday, June 9, 2009

मैं क्या जानूं ?

नए वक्त की नयी रवायत , मैं क्या जानूं ?
नए अदब आदाब अदावत , मैं क्या जानूं ?

चेहरों का साहित्य गूढ़ लिपियोंवाला है ,
आंखों की अनबूझ इबारत मैं क्या जानूं ?

इस नकारखाने में हैं क़ानून ही ढलते ,
है संसद या सिर्फ इमारत , मैं क्या जानूं ?

दंगों और फ़सादों में ज़ब्तोखामोशी ,
मज़हब में क्यों घुसी सियासत ,मैं क्या जानूं ?

सीधे-सादे हर सवाल के टेढ़े उत्तर ,
क्यों विकृत हो गई ज़हानत , मैं क्या जानूं ?

क्यों प्रपंच कुत्साएं हर पल हंसती रहतीं ,
क्यों निष्ठा को मिले नदामत ,मैं क्या जानूं ?

कष्ट कसौटी ,सुख का सोना घिसा जा रहा ,
यह कैसी बेमेल शरारत , मैं क्या जानूं ?
050509/060509.

3 comments:

AlbelaKhatri.com said...

naman
naman
naman
salaam
salaam
salaam

venus kesari said...

कष्ट कसौटी ,सुख का सोना घिसा जा रहा ,
यह कैसी बेमेल शरारत , मैं क्या जानूं ?

बहुत बढ़िया

वीनस केसरी

ravikumarswarnkar said...

चेहरों का साहित्य गूढ़ लिपियोंवाला है ,
आंखों की अनबूझ इबारत मैं क्या जानूं ?

अच्छी रचना...

रवि कुमार, रावतभाटा