Sunday, June 14, 2009

बहुत दर्द जागे तो .......

न चिल्लाऊं ,चीखूं ,न दुखड़े सुनाऊं ।
बहुत दर्द जागे तो चुपके से गाऊं ।।

जहां भी मिले कथनी करनी में अंतर ,
वहां प्यार के मैं उड़ाता कबूतर ।
जहां विषधरों से नहीं भूमि ख़ाली ,
मैं निकला लिए हाथ में दूध प्याली ।
जो काटें मुझे ,उनको अमृत पिलाऊं ।
बहुत दर्द जागे तो चुपके से गाऊं ।।

ये हिंसा ,ये बंटवारे ,धरती गगन के ,
ये इतिहास हैं ,आदमी की जलन के ।
पुकारोगे किसको ,सभी अंधे बहरे !
मुखौटों में सबके छुपे अस्ल चेहरे ।
नशा सबको मीठा है ,किसको जगाऊं ?
बहुत दर्द जागे तो चुपके से गाऊं ।

पुकारूं चलो ऐसी दुनिया बसाएं ,
जहां मिलके झूमें ,जहां मिलके गाएं ।
न मंदिर ,न मस्ज़िद ,न मठ हों ,न गिरजे ,
जहां शुद्ध मन हो ,वो नव-विश्व सिरजंे ।
जहां आके मैं सारे दुख भूल जाऊं ।
बहुत दर्द जागे तो चुपके से गाऊं ।।
13092000

1 comment:

AlbelaKhatri.com said...

abhinav geet...........
bahut dard jage toh chupke se gaaun....waah waah !
bahut khoob !