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*मां तुझे प्रणाम!!*

शुभ प्रभातम

*मां तुझे प्रणाम!!*

*
देह तुम्हारी, सांस तुम्हारी, जीवन दान तुम्हारा!!
सब कुछ है आशीष तुम्हारा, मन अनुदान तुम्हारा!!
वो जो नाम दिया है तुमने, दुनिया उसे पुकारे,
मेरा केवल यह प्रयास, रख पाऊं मान तुम्हारा!!

@ कुमार,
विश्व-मातृ दिवस,
13 मई 18,
रविवार, 7.20 प्रातः
**
सब तहरीरें पढ़कर देखीं, उसके खत सा स्वाद नहीं!!
हर आनंद अधूरा जिसमें उसकी कोई याद नहीं!!
लाख मिले सम्मान, हजारों तोहफ़े मैंने पाये पर,
वे अभिनन्दन झूठे जिनमें, मां का आशीर्वाद नहीं!

*@कुमार,*
9.5.18,
बुधवार, प्रातः 10.55,
जबलपुर

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प्रेमचंद जयंती(31 जुलाई) पर विशेष -
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-डाॅ. रा. रामकुमार,

प्रेमचंद की ‘मंत्र’ कहानी दो वर्गों की कहानी है। ये दो वर्ग हैं ऊंच नीच, अमीर गरीब, दीन सबल, सभ्य और असभ्य। ‘मंत्र’ दोनों के चरित्र और चिन्तन, विचार और सुविधा, कठोरता और तरलता के द्वंद्वात्मकता का चरित्र-चित्रण है। मोटे तौर पर देखने पर यह कहानी ‘मनुष्य और सांप’ के दो वर्ग की भी कहानी है। अजीब बात हैं कि मनुष्य अपनों में सांप बहुतायत से देख लेता है किन्तु सांपों को मनुष्य दिखाई नहीं देते।
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