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नया विहान : पांच दोहे

 नया विहान : पांच दोहे


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ज्ञान आजकल मौन है,

मुखर बहुत अज्ञान।

खींचें वाद विवाद ही,

सदा परस्पर कान।।१.


है तटस्थ जीना कठिन,

कठिन सत्य का साथ।

संघर्षों की राह में,

छुड़ा गए सब हाथ।।२.


सत्याग्रह का मार्ग है,

कठिन कंटकाकीर्ण।

जीवन को सत्यार्थ के,

करे असत्य विदीर्ण।।३.


गैलीलियो, मसीह हो,

या गांधी, सुकरात।

सत्य-मार्ग पर जो चले,

उस पर प्राणाघात।।४.


गया शाम के कान में,

यह कहकर दिनमान।

'प्रिये रात के बाद में,

होगा नया विहान।।'५.


                            @कुमार, 4.1.23, 4.30

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