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रक्षाबंधन का पवित्र पर्व 'राखी'

 रक्षाबंधन का पवित्र पर्व 'राखी''

      पुजारी गण प्रत्येक पुण्य अवसर पर कलाइयों में कलावा बांधते समय जिस मंत्र का पाठ करते हैं, वह प्रसिद्ध  श्लोक यह है-         
              येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:
              तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि, रक्षे माचल माचल:।
।

           अर्थात जिसने दानव राज राजा बलि को बांध लिया, उसे मैं तुम्हें बांधकर प्रतिबद्ध करती हूं कि अचल रूप से मेरी  रक्षा करने से विचलित न होना।          
             इस श्लोक के पीछे एक पौराणिक कथा प्रसिद्ध है कि पराक्रमी राजा बलि से देवताओं की रक्षा के लिए, वामन रूप में विष्णु ने तीन पग भूमि मांगी जो बलि ने प्रमादवश स्वीकार कर ली। 
                तुरन्त विराट होकर विष्णु ने पृथ्वी और पाताल ले लिया। तीसरे पग के लिए बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। तब प्रसन्न होकर विष्णु ने पाताल लोक उसे लौटा दिया और कोई एक वर मांगने को कहा। 
                 बलि ने विष्णु को अपने साथ पाताल में ही रहने का वर मांग लिया। विष्णु विवश हो गए। तब चिंतित होकर विष्णुवल्लभा लक्ष्मी ने दरिद्र स्त्री के रूप में बलि को कलावा बांधकर अपना भाई बना लिया। बलि ने प्रतिदान में कुछ भी मांगने के लिए कहा।
                   दरिद्र-रूप लक्ष्मी ने अपने स्वरूप में आकर विष्णु की पाताल-मुक्ति मांग ली। अब बलि को विवश होकर विष्णु को मुक्त करना पड़ा। 
            उसी कथा का निबंधन इस श्लोक में है।
            दूसरी ऐतिहासिक कथा भी है।  साल 1530 में, राणा सांगा के निधन के बाद रानी कर्णावती मेवाड़ की गद्दी संभाल रही थीं। तभी गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने चित्तौड़ पर चढ़ाई कर दी। मेवाड़ की सेना संख्या और संसाधनों में कमजोर थी। हालात इतने गंभीर थे कि राज्य को बचाना लगभग नामुमकिन लग रहा था। 
              चित्तौड़ की रक्षा के लिए रानी कर्णावती ने एक साहसिक और अनोखा कदम उठाया। उन्होंने मुगल बादशाह हुमायूं को एक राखी भेजी चित्तौड़ की रक्षा का निवेदन किया।  हुमायूं को राखी मिली तो वे  प्रभावित हुए। उन्होंने इसे केवल एक राजनीतिक संदेश नहीं, बल्कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का आह्वान माना।  तुरंत मेवाड़ की मदद के लिए हिमायूनी सेना तैयार की, कूच किया। उसके समय पर नहीं पहुंच सकने से बहादुर शाह ने चित्तौड़ पर कब्जा कर लिया था और रानी कर्णावती अन्य रानियों सहित जौहर कर चुकी थी। 
        रानी कर्णावती के भाई बादशाह हुमायूं ने और भी ताकत के साथ चित्तौड़ पर हमला कर गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह को हराया और बहन के स्वाभिमान की रक्षा की। चितौड़गढ़ जीतकर उसे रानी कर्णावती के बेटों को सौंप दिया। 
          यह घटना सिर्फ राजस्थान के इतिहास में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में रक्षाबंधन की सबसे अनोखी मिसाल बन गई
     सचमुच राखी के धागों में बड़ी शक्ति है।     
           अब तो माना जाने लगा है कि मित्रों को, पारिवारिक जनों, सम्पर्कित जनों को आपस में सौहार्द्र के लिए भी कलावा या रक्षा सूत्र बांधना चाहिए। 
              महाराष्ट्र एवं अन्य स्थानों में दीर्घ संबंधों के लिए पत्नियां पतियों को कलावा बांधती हैं। 
             लोग तो अपने वाहनों, कंप्यूटर, गैस चूल्हा, अलमिरः, साईकल वगैरह में श्रावणी पूर्णिमा को कलावा या धागे बांधकर अपना लगाव प्रदर्शित करते हैं।
             लेखक, कवि, प्राध्यापक, विद्यार्थीगण अपनी पुस्तक की अलमिरः, पाठ-मंच (टेबल) में रक्षासूत्र बांधते हैं। 
आपको जो प्रिय और अभीष्ट हो उसके चिर सहयोग और प्रगाढ़ सम्बन्धों के लिए रक्षासूत्र बांधें। 
                                                        @ कुमार, 
     ०९.०८.२५, श्रावणी पूर्णिमा, रक्षाबंधन पर्व, शनिवार।
            


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