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 एक ग़ज़ल 


पिछले किसी फ़साद पे उलझा दिखाई दे
बातें वो चौंक चौंक के करता दिखाई दे 

हर बात पर उसे सदा खटका दिखाई दे
अपनों के बीच में भी वो सहमा दिखाई दे 

जंगल की कोई बात उसे चुभ गयी होगी
टेसू का पेड़ इसलिए दहका दिखाई दे 

ईडी की ऐड़ उसको ही लगती है आजकल
राजा जिसे--- हो नंगा तो नंगा दिखाई दे 

बन्दर के हाथ उस्तरा मत दीजिए कभी
काटे गला तो उसको सफलता दिखाई दे 

@कुमार, २९.०६.२०२२, बुधवार,


ऐड़ : चाबुक की मार,

Comments

बन्दर के हाथ उस्तरा मत दीजिए कभी
काटे गला तो उसको सफलता दिखाई दे

सार्थक ग़ज़ल
जंगल की कोई बात उसे चुभ गयी होगी
टेसू का पेड़ इसलिए दहका दिखाई दे…
वाह बहुत सुन्दर गजल❤️
जंगल की कोई बात उसे चुभ गयी होगी
टेसू का पेड़ इसलिए दहका दिखाई दे... वाह!बहुत ही सुंदर।
सादर
हर शेर कुछ कहता हुआ। बेहतरीन गजल। समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर भी भ्रमण करें आदरणीय।
Sweta sinha said…
वाह.. लाज़वाब ग़ज़ल।
Sudha Devrani said…
ईडी की ऐड़ उसको ही लगती है आजकल
राजा जिसे--- हो नंगा तो नंगा दिखाई दे
वाह!!!
बहुत ही लाजवाब गजल।
शानदार ग़ज़ल बहुत कुछ कहती सी।
R.Ramkumar said…
आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।

व्यक्तिगत उत्तर का ऑप्शन किसी कारण से आ नहीं रह।
https://drramkumarramarya.blogspot.com said…
बहुत आभार