1अप्रैल 2025, मंगलवार अप्रैल फूल दिवस है एक मूर्ख बनाओ दिवस मि. अल्वर्ड विकी ने बड़ी शालीन भाषा में इस दिवस, अप्रैल फूल, मूर्ख दिवस,सकल मूर्ख दिवस को महिमामण्डित करते हुए लिखा है :' अप्रैल फूल दिवस ' पश्चिमी देशों में प्रत्येक वर्ष पहली अप्रैल को मनाया जाता है। कभी-कभी इसे ऑल फ़ूल्स डे (सकल मूर्ख दिवस)के नाम से भी जाना जाता हैं। अप्रैल आधिकारिक छुट्टी का दिन नहीं है परन्तु इसे व्यापक रूप से एक ऐसे दिन के रूप में जाना और मनाया जाता है जब एक दूसरे के साथ व्यावाहारिक परिहास और सामान्य तौर पर मूर्खतापूर्ण हरकतें की जाती हैं। इस दिन मित्रों, परिजनों, शिक्षकों, पड़ोसियों, सहकर्मियों आदि के साथ अनेक प्रकार की नटखट हरकतें और अन्य व्यावहारिक परिहास किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य होता है, बेवकूफ और अनाड़ी लोगों को शर्मिंदा करना।" वैसे देखा जाए तो आज जिसको प्रैंक कहते हैं वह बहुत पुराना खेल है। कुछ ऐसा कहना, करना या दिखाना जिसे सामनेवाला व्यक्ति सच मन जाए। इसका उद्देश्य धोखा देकर नुकसान पहुंचाना नहीं है, बस लोकरंजन है, मज़े लेना है। परम्परा बन गई है कि एक अप्रैल को लोग मूर...
नांदगांव उर्फ़ राजनांदगांव : विनोदकुमार शुक्ल की दृष्टि से फेसबुक के अपने पेज पर, मैंने आ. विनोदकुमार शुक्ल पर दो आलेखों की लिंक भी शामिल की थी, इस टिप्पणी के साथ... यह स्मरण-पत्र विनोदकुमार शुक्ल भाई के जन्मदिन पर तैयार किया था। लगभग तीन महीने बाद जब उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला और वे पुनः एक बार फिर बेहद चर्चित हुए। उन्हें कनक तिवारी जी (राजनांदगांव, दुर्ग), अशोक वाजपेई (दुर्ग, दिल्ली), राधावल्लभ त्रिपाठी (भोपाल), रवीशकुमार (दिल्ली), अशोककुमार पांडे (दिल्ली) आदि ने याद किया तो मैंने भी अपने लुप्तप्राय प्रयास को हवा में उछाल दिया। देखें कितनों के हाथ आए। ० इस प्रस्तुति पर मित्र हेमंत व्यास ने अहमदाबाद से टिप्पणी की - "नौकर की कमीज" पुस्तक मैने हिमांशु के यहा पढी थी, उसमें राजनांदगांव की कुछ जगहों का जिक्र किया है। ० उनकी इस टिप्पणी के उत्तर में मैंने विनोदकुमार शुक्ल की नांदगांव उर्फ़ राजनांदगांव पर लिखी यह कविता भेजी, इस टिप्पणी के साथ - 'राजनांदगांव जिसे नांदगांव कहना, नन्दूलाल जी भी सही मानते थे, विनोद कुमार जी को भी...