Friday, April 17, 2009

अनुभूतियां अभिव्यक्तियां

अनुभूतियां , अभिव्यक्तियां ,
जीवन की दो धु्रवशक्तियां ,
पीला चरण ळै आचरण ,दूजा चरण अनुवृत्तियां ।।

रचना का पहला धर्म है , संवेदना जीवित रहे ।
विचलित न हो जो हार से , साहस से चिरसिंचित रहे ।
एकाकी होकर भी चले,
उसका मनोबल क्या दलें,
दूषित स्वजीवी हेकड़ी , बूढ़ी अपाहिज भ्रांतियां ।।

अपने लिए सुविधा रखे , दुविधाएं देकर अन्य को ।
निर्मल सुजन कब पूजते ,ऐसे दुमुख सौजन्य को ?
उपकार की गणना करे ,
हर सांस में करुणा भरे ,
उसकी बनावट टूटती ,चलती जो सच की आंधियां ।।

अपने को रखकर केन्द्र में दूजे का मूल्यांकन करे ।
प्रतिफल की आशा में सदा , आदर्श का पालन करे ।
अपने लिए जीता मरे ,
विद्वेष विष पीता फिरे ,
ऐसे अभागे व्यक्ति की , खुलती कभी न ग्रंथियां ।।

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